शिव महापुराण एक ऐसा महान प्राचीन पुराण है जिसके सुनने और सुनाने से मनुष्य जन्मो के पापो से मुक्त हो जाता है, यह शिवपुराण ग्रन्थ चौबीस हजार श्लोको से युक्त है और इसकी सात हज़ार सहिंताएं है. आज हम आपको शिव महापुराण की महिमा के बारे में एक प्राचीन कहानी के द्वारा बताएँगे जिसे शिव महापुराण के माहात्म्य से लिया गया है.

शिव महापुराण की महिमा –

शिव महापुराण में सूत जी शिव महापुराण की कथा सुनाते हुए शौनक जी से कहते है. मुने! जो मनुस्य पापी, दुराचारी, खल तथा काम क्रोध आदि में निरंतर डूबे रहने वाले है. वो भी इस शिव महापुराण के श्रवण से अवश्य ही शुद्ध हो जाते है. और आगे सूत जी एक प्राचीन इतिहास से उदाहरण लेकर शौनक जी को एक कथा सुनाते है और शिव महापुराण की महिमा के बारे में बताते है.

देवराज ब्राह्मण की कहानी –

बहुत पहले की बात है की कही किरासो के नगर में एक देवराज नाम का ब्राह्मण रहता था, जो ज्ञान में अत्यंत दुर्बल, दरिद्र तथा धर्म से विमुख था. वह सुबह शाम को स्नान आदि कर्मो से भर्स्ट था, एवं वेश्यावृति, छल, कपट इत्यादि में रहता था, जब किसी नगर का ब्राह्मण ही ऐसा था तो अन्य वर्णो की बात ही क्या की जाये सभी वर्ण क्षत्रिय, शुद्र आदि भी इन्ही कर्मो में लिप्त थे.

एक दिन वह घूमता फिरता प्रतिष्ठानपुर (झूसी प्रयाग, इलाहाबाद) में जा पंहुचा, वहा उसने के शिवालय देखा वहा पर बहुत सारे साधू महात्मा एकत्रित हुए थे. देवराज तेज ज्वर से पीड़ित था तो वह उसी शिवालय में रुक गया. तेज ज्वर के कारण वह वही लेट गया. शिवालय में एक ब्राह्मण देवता “शिवमहापुराण” सुना रहे थे. देवराज शिव कथा को निरंतर ज्वर में लेटे-लेटे सुनता रहा. एक माह बाद वह ज्वर से अत्यंत पीड़ित होकर चल बसा. यमराज के दूत आये और उसे पैसो में बांधकर यमपुरी ले गए. इतने में यमपुरी में ही भगवन शिव के पार्षद गण आ गए जो रुद्राक्षो की मालाओ एवं भस्म से सुशोभित थे.

उन्होंने यमपुरी में जाकर, यमदूतो को मार भगाया तथा देवराज ब्राह्मण को एक अदभुत विमान में बैठकर कैलाश पर्वत की और जाने लगे. इस बात से यमपुरी में हाहाकार मच गया और ये बात यमराज तक पहुची. यमराज स्वयं इस बात को जानने वह पर पहुचे. जब उन्होंने देखा ये तो शिव जी के शिवदूत है तो उन्होंने उनकी पूजा बन्दना की तथा उन्होंने उन्हें कैलाश पर्वत के लिए विदा किया. शिवदूतो ने देवराज की आत्मा को दयासागर शिव जी को अर्पण कर दिया.

आप विस्तार से श्रीशिवमहापुराण की महिमा अर्थात श्रीशिवपुराण माहात्म्य को यहाँ से पढ़ सकते है। या फिर आप चाहे तो श्रीशिवमहापुराण को ऑनलाइन आर्डर करके घर मंगवाकर नित्य पाठ कर सकते है।

निष्कर्ष

अब आप समझ गए होंगे की शिवमहापुराण को पढने, सुनने और सुनाने से क्या क्या मिल जाता है. ऐसी है हमारे शिव जी की महिमा. शिव जीऔर शिवमहापुराण को बारम्बार नमन करता हु. आगे भी में आपको अलग अलग पुराणों से कुछ कहानिया पोस्ट करूँगा जो आपको और आपके बच्चो के लिए प्रेरणादायक होंगे. धन्यवाद

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